अच्छा पल बुरा पल -A great struggling story

बुधवार की रात थी । जैसे ही मै अपना काम ख़त्म करके office  से बाहर निकला तो अचानक मेरे फोन  की घंटी बजी । मैने देखा तो  phone मे  एक msg आया हुआ था  । msg मे एक बहुत ही अलग संदेश लिखा था  । जो कूछ इस तरह से था ।

Tommorow a very important meeting of the strugglers , all  your questions clear on this meeting. pls अपना थोड़ा टाइम ज़रूर निकालना  |



वो msg किसी unknown number से आया था । मैने internet से number search करने की कोशिश की पर कोई  नाम show  नही हुआ ।
Address और meeting  का time msg मे लिखा था । मैने msg को ignore किया और घर चल दिया  । अगली रात जैसे ही  मे अपना काम ख़त्म करके office से घर को निकलने वाला था, तभी मेरे दोस्त ने मुझे एक बात कही । वह बताने लगा ,'' यार ये struggle  बहुत बुरी चीज़ है । आदमी को परेशान कर के रख देती  है ।''

तभी मेरे दिमाग मे अचानक बात आयी । मुझे याद आया की आज रात को तो वो meeting थी । मुझे तो वहाँ जाना था ।
तभी मैने अपनी car start  की और office से निकल पड़ा । meeting hall  office से करीब 3 घण्टे  के रास्ते मे था । मैने घर पर phone कर दिया और बता दिया  की मै आज घर नही आऊगा ।
बस तभी मै वहाँ से निकल पड़ा । मुझे इतना समझ नही आया की मै किसी unknown number के कहने पर वहाँ कैसे जा रहा हूँ ?
 मेरे दिमाग मे अलग -अलग तरह के ख्याल आने लगे । कही कोई मुझे बेवकूफ तो नही बना रहा है , पर struggle शब्द सुनते ही मुझे यकीन सा हो गया था कि ये msg जिस ने भी किया है ,वो मेरे साथ मजाक नही कर रहा  ,कूछ तो बात ज़रूर होगी ।

खेर तीन घण्टे का टाइम music सुनते -सुनते कब बीत गया पता ही नही चला । वैसे भी मुझे  बचपन से ही driving का शौन्क था । जिस वजह से मे car मे बोर भी नही हुआ । करीब  9 बजे मै  वहाँ पहुँचा।
वहाँ पहुँचते ही मैने देखा कि उस msg मे लिखी हुई बात मे वाक़ई सच्चाई थी ।
वहाँ काफी भीड़ लगी थी । मैने अपनी  गाड़ी  पार्क की और  आगे ticket  counter की और  चल पड़ा । सभी लोग लाइन मे लगे टिकेट्स खरीद रहे थे । मै सोचने  लगा की जो आदमी ये शो करने जा रहा है उस की बात मे ज़रूर कूछ दम होगा , तभी तो ये सभी लोग लोग line मे लगे है । मै भी  चुप्प - चाप  लाइन  मे लग गया  । 
लगभग एक - दो मिनट बाद एक  आदमी मेरे पास आया और पीछे से मेरा नाम लेकर पुकारने लगा ।

मैने पीछे मुड़ कर देखा तो कोट पेंट पेहने एक आदमी खड़ा था । वो पहले तो मुझे लाइन से बाहर  ले गया । फ़िर बाद मे वो मेरा नाम लेकर मेरे बारे मे  पूछने लगा  । मै हैरान  था की वो मेरे बारे मे इतना कुछ कैसे जानता है । वो कहने लगा , ''sir आप मुझे नही जानते होगे, पर मै आपको अच्छे से जनता हूँ !'' आपसे मिलकर सचमुच बहुत खुशी हुई । उस ने जो बात कही वो सुन कर मै भी सौच मे पड़ गया । वो कहने लगा कि sir आपको लाइन मे लगने को कोई ज़रूरत नही , आपकी पहचान की एक लड़की आयी थी और उसने आपकी ticket already advance मे book  करवा दी है । इसलिये आप इस लाइन मे ना लगे ।
लेकिन मै अपने पहचान की कोई भी  ऐसी लड़की के बारे मे नही जानता था  जिस ने ये काम किया हो  । जिन -जिन लोगो पर मुझे शक था ,उनको मैने phone किया और पूछा ? पर उनमे से ऐसा कोई भी नही था जिस ने ये काम किया हो । मैने उससे लड़की का नाम पूछा तो उस ने कहाँ की sir मे उस के बारे मे कुछ नही जनता । उस आदमी ने कहाँ कि sir आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है ,आप शो को enjoy कीजिये ।

वो आदमी मुझे अन्दर ले गया । मैने उससे उसके बारे मे पूछा तो उसने बताया की वो इस कॉन्सर्ट का manager है । उसने मुझे मेरी seat पर बेठाया , और बोला ,'' sir अगर कोई problem हो तो आप मुझे बता दीजियेगा । फ़िर वो वापिस.चला गया । मेरे दिमाग मे अभी तक सिर्फ एक ही बात थी कि आखिर  इस शो मे ऐसी कौन सी बात होगी जो मै इतनी दुर चला आया ।
थोड़ी देर बाद show start हो गया  । एक आदमी स्टेज पर आया । काफी देर तक वो अपनी speech देता रहा । speech मे कई शब्द ऐसे थे जो काफी emotional थे । काफी कूछ बोलने के बाद वो struggle पे आ गया । कई सारी बाते बताई । कभी कुछ तो कभी कुछ ।
At last वो सोफे पर बेठ गया और एक दम से शांत हो गया । लगभग 5 मिनट तक वो पूरी तरह से शांत रहा ।
उसने मुँह से एक शब्द तक नही बोला । उसने last मे सिर्फ एक बात कही जो मेरे दिल को छू गयी । उसकी speech मे कही बात कुछ इस तरह से थी ।
'' आप एक पल  को मन मे अच्छे से imagine  करो । मान लो कि आप किसी बहुत बड़े highway के किनारे पर खड़े हो। आप बिल्कुल अकेले हो और बारिश हो रही है । आप के आस पास कोई नही है । आप किसी छत या पेड़ के नीचे हो । चारो और सनाटा है । टाइम दोपहर के 2 बजे है ।  सभी तरफ़ गौर अँधेरा है ।

एक गाड़ी आयी और आपके पास से तेजी से गुजर गयी । गाड़ी जा रही है , आप उस गाड़ी को देख रहे हो । दुर अँधेरे मे जाकर गाड़ी दिखनी बन्द हो गयी । ऐसे ही गाड़ी आ रही है और जा रही है
और आप बेठे ये नजारा देख रहे है । बस तभी दिमाग मे एक बात आती है कि आप ने क्या सोचा था और आप क्या कर रहे है । जिन्दगी ने आप से क्या करवाया  । तब पता है दिमाग मे क्या बात आती है , समझ मे आता है कि struggle के दो पेह्लू होते है ।

एक सबसे अच्छा पेह्लू और एक सबसे बुरा पेहलू ।
तब बेठे -बेठे  सड़क के उस आखिरी छोर  को देखे जा रहा हूँ और सोच रहा हूँ कि यार वो पल भी कितना बुरा रहा होगा , जब इतनी मुसीबत मे जिन लोगो से मदद कि उमीदें थी ,लेकिन उन्होने एक वार भी अपना हाथ आगे नही बढ़ाया ।
अगर उनमे से एक भी मदद कर देता तो शायद मै भी वो कर पाता जो मैने सोचा था । तब याद आता है कि वो पल सचमुच मेरे लिये कितना बुरा रहा होगा । मेरे बुरे वक़्त मे कोई काम नही आया । पर काम आया तो आया कौन ?

वो अनजान लोग , जिनसे मैने कभी मदद कि उमीदें भी नही कि थी । जिनके बारे मे मैने सपने मे भी नही सोचा था कि वो मेरे काम आयेगे ।
चलो इसे भगवान कि मर्जी समझूं या कुछ और कोई तो भगवान बनके मेरे काम आया और तब वो पल आपको struggle के समय का सबसे अच्छा पल लगने लगता है । क्योंकि मुसीबत मे थोड़ी सही पर मदद तो हो ही गयी।''

बस इतना कह कर वो आदमी चुप चाप उठ कर चला गया । चारो तरफ़ तालियों की गूँज सुनायी देने लगी और मै भी उठा गाड़ी start की और कही दुर जाकर गाड़ी एक जगह खड़ी की ।
दुकान से एक कोल्डड्रिंक ली और गाड़ी के फ्रंट पर जाकर बेठ गया । बस वहाँ पर बेठे बेठे cold drink पी रहा हूँ और याद कर रहा हूँ अपने struggle के दिनो को ।

सही कहाँ है किसी ने  कि

'' संघर्ष मे आदमी अकेला होता है ,
  सफलता मे दुनिया उसके साथ होती है ।
जिस जिस पर ये जग हँसा है ,
उसी - उसी ने ईतहास रचा है । ''