आखिर क्यों निकाल दिया जाता है आपको किसी काम या नौकरी से -सबसे बड़ा कारण जानिये


प्रेरणा  एक ऐसा magic है ,जो आपको अंदरूनी तथा बाहरी दोनो माहौल मे असर डालता है । जब तक आप किसी काम को लेकर प्रेरित रहेंगे ,तब तक आप की  मुशकिले आसान होती जायेंगी । दुनिया की अगर बात करे तो सिर्फ प्रेरणा ही है ,जिस की वजह से लोग काम को अच्छे तरीके से कर पाते है ।


Note:- This article is  inspired by   the   book   of   ''You can win''.written by shiv khera. The revised thoughts of our simple language.

हर काम मे प्रेरणा  अलग -अलग तरह की होती है ,और यही किसी व्यक्ति विशेष पर भी लागू होती है ।
अगर किसी नौकरी या रोजगार की बात करे तो उस मे भी प्रेरणा के अलग - अलग पड़ाव (stages ) होते है उस पड़ाव का आपकी नौकरी पर सीधा असर पड़ता है ।
आये शुरू से जानते है कि जब आप किसी नये काम कि शुरुआत करते है तो आपके साथ मे आखिर क्या -क्या होता है । 
किसी काम या नौकरी मे Enter  करते हुए आप चार पड़ाव (stages) से गुजरते है ,इसे ज़रा ध्यान से समझने कि कोशिश कीजियेगा । आप कोई काम करने ,या कोई काम ,हो सकता है कि वो आपका खुद का हो ,पर आप ने छोड़ दिया हो या फ़िर आप अपनी नौकरी से relate करके देख सकते हो ।
1. प्रेरणा पर बेअसरदार (Motivate But ineffective ):
जब भी कोई व्यक्ति कोई नय काम को शुरू करता है या फ़िर कोई नय रोजगार से जुड़ता है तो वो काम के (Motivate and ineffective ) इस पड़ाव से गुजरता है ।
यह पड़ाव सबसे अच्छा होता है । इसमे आप काम के अच्छे पेहलू को देखते है । आप अपने काम को लेकर पूरी तरह से प्रेरित होते है ।
आप को अगर कोई छोटा सा काम भी करना पड़े ,वो भी बहुत अच्छे तरीके से करते हो । आप के नय -नय सपने उस काम से जुड़े होते है ।
पर इस पड़ाव पर आपको पता नही होता कि आखिर मुझे करना क्या है । आप अपने काम को लेकर प्रेरित पूरे होते है ,पर करना क्या है ये आपको  अभी पता नही होता क्योंकि आप उस रोजगार या संस्था से नय -नय जुड़े होते है ।
आप अभी motivate पूरे है ,लेकिन अपने काम से अनजान है । 
इसके लिये संस्था को चाहिये कि उस व्यक्ति को उसके काम की उचित जानकारी दी जाये ।
फ़िर समय के साथ -साथ वो व्यक्ति धीरे- धीरे अपने काम की जानकारी प्राप्त करता है । उस व्यक्ति को संस्था द्वारा उसके काम की training करवायी जाती है । ये process कम से कम 2-3 महीने तक चलता है । 

2. प्रेरणा और असरदार (Motivate and effective ):- 
उचित ट्रैनिंग (Practice ) और काम की जानकारी  प्राप्त होने के बाद व्यक्ति को ये समझ मे आ जाता है कि उसे आखिर करना क्या है ।
अब व्यक्ति का अपने काम के प्रति पूरा समर्पण होता है और वो काम को लेकर पूरी तरह से प्रेरित (motivated ) होता है । 
 व्यक्ति अब दिन -रात काम करता है , वो अपनी शमता  (capacity ) से अधिक काम करता है । उसको ये परवाह नही होती कि वो कितने घंटे काम कर सकता है और ये असर उचित training और अभ्यास का ही नतीजा है । 
कई वार तो काम कि वजह से वो अपना खाना -पानी भी भूल जाता है क्योंकि उसे अब पता होता है कि क्या करना है ओर वो उसको लेकर प्रेरित भी है । उसके boss और बाकी लोग भी ये देख कर खुश होते है कि लड़का काम करने वाला है और काफी मेहनती भी है ।
Note :- यहाँ पर मलिक (Boss ) का फर्ज बनता है कि अपने employee से ज्यादा काम ना करवाये और काम करने वाले को भी इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिये कि वो ज़रूरत से ज्यादा काम न करे । जिस काम कि जितनी value है उसे सिर्फ उतना ही time दे , ज़रूरत (value ) से ज्यादा काम करने से आपकी energy और time दोनो की ही बरबादी है । 
और आगे चलकर दोनो को ही दिकत का सामना करना पड़ेगा जो हमे तीसरे पड़ाव की और ले जायेगा । 

3. प्रेरणाहीन पर असरदार (Demotivate But effective ):- 
इस पड़ाव तक पहुँचते -पहुँचते आपको अपने काम के सारे Benefits and losses पता चल चुके होते है । आप अपने काम के बारे मे काफी कुछ जान चुके होते है । 
अब आपकी आपके काम के प्रति प्रेरणा काफी ख़त्म चुकी होती है और इसका सीधा असर आपके काम पर दिखता है । 
आप काम तो कर रहे होते है पर आपका काम को करने का कोई खास मन नही होता  , आप सिर्फ उतना ही काम करते है ,जितने से आपका काम चल सके या फ़िर boss आपको नौकरी से निकाले नही । 
यह बहुत ही खतरनाक पड़ाव होता है । अगर आप इसमे उलझ जाते है तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है । आप अगर किसी वजह से अपने काम के प्रति प्रेरित हो भी जाते है तो वो प्रेरणा टिकाऊ नही होती । 
और ज्यादा देर तक उसका असर नही होता । आपकी काम के प्रति शमता कम होना, सभी देख रहे होते है ।

प्रेरणा ख़त्म होने की कई वजह हो  सकती है ।
1. आगे ना बढ़ पाने का डर ।
2.काम के benifits को छोड़ कर losses को ज्यादा देखना ।
3. politics से गुजरना ।
4. कोई और काम करने की ईच्छा ।
5. काम करने के बदले मे जो आपको expectation ( उमीदें ) थी ,उनका पूरा ना होना ।
6. काम को छोटा समझना ।
7. किसी 3rd person की बातो मे आकर काम को कम करना । 
8.सपनो का टूटते हुए दिखाई देना ।
9. love life का बीच मे आना ।
10. काम मे आपको इज्जत ना मिलना ।
11. बेवजह की टिप्पणियों का आपके ऊपर इस्तेमाल मिलना ।
12. आपकी तुलना किसी दुसरे से करना ।
13. अकेलेपन का डर । 
14. आप का कोई नज़दीकी हो सकता है जिसको आप पसंद या प्यार करते हो ,उसका काम को छोड़ कर चले जाने की वजह से भी आपका काम मे मन ना लगना या उसको देख करके भी आपका काम को छोड़ने का फ़ेसला करना । 
15. काम की वजह से आपका शरीरिक नुकसान होंना ।
16. आपकी financial जरूरतें उस काम से पूरी ना होना ।
ये list बहुत लम्बी हो सकती है क्योंकि हर व्यक्ति का काम अलग -अलग होने की वजह से उसकी problems भी अलग -अलग होती है ।
पर इसकी वजह से आपके काम का बहुत नुकसान होता है ।
4.प्रेरणाहीन और बेअसर (Demotivate and ineffective ):- 
ये  stage आपके लिये आखरी stage होती है ,इस stage पर पहुँचते -पहुँचते आप उस काम को छोड़ देते हो या फ़िर मलिक (boss) के पास आपको काम से निकालने  के अलावा और कोई opition नही होता । 
क्योंकि यहाँ पर न तो आप काम को ढंग से करते हो और ना ही आपके अन्दर प्रेरणा बचती है । आप सिर्फ इस ताक मे बेठे होते हो कि कैसे इस काम को छोड़ा जाये या फ़िर मलिक आपको खुद ही निकाल देता है । इसके बाद आपकी life फ़िर से बदलने वाली होती है ।
अब बहुत सारे सवाल खड़े होते है कि ऐसा क्यों होता है ?
इसकी वजह से आपकी life पर क्या असर पड़ता है ?
आपके आसपास के माहौल पर कैसा असर पड़ता है ?
आसान शव्दो मे कहाँ जाये तो कोई भी काम छोटा नही होता ,काम के प्रति आपका नज़रिया छोटा होता है । 

उन लोगो के लिये जो कुछ ओर करना चाहते थे ,जिनके सपने कुछ ओर थे ।

अगर वो काम आपके फायदे से ज्यादा नुकसान करवा रहे हो ! आप का सपना या लक्ष्य कुछ और करने का है , पर अपनी मजबूरी की वजह से कर रहे थे तो उस काम को छोड़ देना ही बेहतर था क्योंकि वो काम आपके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट थी । इसी को तो risk बोलते है कि आप के जीवन मे सपने कुछ ओर थे और आप कर कुछ ओर रहे थे । अगर उसी मे अटके रहते तो वो कभी नही बन पाओगे जो आपके सपने है ।
सब लोगो के , घर वालो के againest जाकर ,अगर आपने काम को छोड़ भी दिया था या फ़िर आपको काम से निकाल भी दिया तो इसमे दिक्कत क्या थी । 
घर वाले शुरू -शुरू मे againest जाते है , फ़िर बाद मे सब कुछ ठीक हो जाता है । dhoni movie  देखी है , अगर वो भी यही सोच  के बेठा रहता कि मुझे तो T.C ही बने रहना है , सरकारी नौकरी है , life कि security बन जायेंगी तो आज cricket team मे dhoni नही होता । 
उस वक़्त जब धोनी ने नौकरी छोड़ी ,उसके पास भी कोई opportunity नही थी ,पर फ़िर भी उसने risk लिया और नौकरी छोड़ दी ।
हमेशा याद रखे कि कमजोर लोग सुरक्षा तलाशते है जबकि जीतने वाले अवसर ।

उन लोगो के लिये जिनका सपना वही काम था ,उनका लक्ष्य वही   था ।

अगर तो आपका सपना वो काम नही था तो ठीक , पर अगर आपका लक्ष्य ,सपना वही काम था तो क्या करे ।
अगर तो आपका खुद का काम है ,या फ़िर कोई professional काम है ;फ़िर तो चिंता की कोई बात नही । आप उस काम को दोबारा वे start करे । 
आप अपनी पिछली गलतियों को ध्यान से देखे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से आपकी motivation पर असर पड़ा ।  फ़िर उस गलती को दोबारा ना दोहरायें , बड़ा simple है ।
लेकिन दूसरी तरफ़ अगर आपको job से निकाल दिया गया है तो यहाँ पर नयी job  ढूढने मे थोड़ी problem जरूर होगी ,पर कोशिश करने से वो भी मिल जायेंगी ।
ओर दोबारा जिस वजह से job से निकाले गये ,उससे बचने का प्रयास करे ।
conclusion :- अगर तो आप का उस काम या नौकरी मे मन नही था तो उसका छुटना ही बेहतर था , लेकिन अगर वो काम आप के लिये important था , आपकी अंदरूनी इच्छा थी उस काम को करने की, तो इसका सिर्फ एक ही उपाय है कि आप काम के छूटने से पहले ही उसे सम्भाल ले । 
इसके लिये आपको तीसरे पड़ाव से दोबारा दुसरे पड़ाव पर पहुँचना होगा ओर सिर्फ उसी पड़ाव पर टिके रहना है । सिर्फ training ही इसका एक मात्र उपाय है । अपने काम के बारे मे इतनी knowledge ईकठ्ठी  करो , इतनी information इकट्ठी करो जिसकी कोई हद नही ।
आप इतना सा करोगे ओर आपकी लाइफ बदल जायेंगी ।

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