खिलखिलाओ खुश रहो ।। खुश रहने का मौसम आ गया ।


 life मे सबसे इंपोर्तोटेड चीज़ क्या है ?यही सवाल का जवाब आपके और मेरे दिमाग मे चले तो सिर्फ एक ही बात निकलकर आती है कि खुशी तो  क्यों ना आज से हम जिंदगी का नया अकाउंट खुलवाए ,टेंशन को टाटा करके खुशियों का बेलेन्स बनाये ।


खुद मे ही है खुशी 

खुशी का मामला "कस्तूरी "ढूँढ़ने जैसा है । अर्थात जो कस्तूरी हिरण की नाभि मे होती है ,उसे वह जंगल मे ढूँढता है । वाकई ,खुशी की खोज हमारे लिये कस्तूरी ढूँढ़ने जैसा ही है । कोई इसे ताउम्र तलाशता रह जाता है तो कोई पा लेता है खुद मे ही खुशी । खुशी भीतर तो है पर इसे बाहरी तत्व भी प्रभावित करते है । संयुक्त राष्ट्र की वर्ड रिपोर्ट बताती है कि हमारा देश खुशहाली के मामले मे 11 पायदान नीचे खिसका है यानी आंकड़ों की नज़र मे खुशहाली घटी है हमारे मुल्क मे । आखिर क्यों ?
इस सवाल के जवाब मे motivational speaker डॉ.विवेक बिंद्रा कहते है , "माडर्न मैनजमेंट की बात करे तो सबसे पहले शारीरिक प्रबंधन ,फ़िर मनसिक ,बौधिक और फ़िर आध्यात्मिक प्रबंधन की बात आती है । आज संतुष्टि इसलिए नही है क्योंकि हम फर्स्ट स्टेप पर ही अटके है ।
जब हम शारीरिक जरूरतों को ही पूरा नही कर पा रहे है तो आध्यात्मिक जरूरतों की और कैसे बढ़ पायेंगे । 
गीता के तीसरे अध्याय के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसे समझाया है ,कोई व्यक्ति आनँद के स्तर पर तब ही पहुँच पायेगा जब वह शरीर से ऊपर उठ पायेगा । जिसको भूख है ,वह खुशी खा से पायेगा । जड़ मजबूत नही होगी तो फल फल कहाँ से आयेंगे ।

आत्मसंतुष्टि मे आनँद 

समाज का बड़ा तबका रोटी ,कपडा और मकान जुटाने की कवायद मे अपने दिन गुजार रहा है ,जिंदगी की दौड़ मे आगे निकलने की जद्दोजहद मे जूटा है । उससे खुशहाली दुर हो सकती है लेकिन कही ना कही खुशी तो तलाशनी ही होगी । रुन्की गोस्वामी एक मल्टीनेशनल कंपनी की ग्लोबल मार्केटिंग हेड है और काफी व्यस्त रहती है ।  लेकिन उन्होने संगीत प्रेम को अपनी खुशी का जरिया बनाया है । वे स्टेज पर लोकगीतों की live परफार्मेस देती है । 
अब वे लंदन मे इंडियन हाई कमीशन के नेहरू सेंटर मे होने वाली कर्यक्रम मे करीब 15 भाषाओं मे लोकगीत पेश करने वाली है । 
वे कहती है ,"मेरी आय का जरिया तो मेरी जाब है लेकिन मेरी लोकगीतों मे मुझे क्रियेटिव satisfaction मिलता है । इस प्रकार काम और संगीत के संतुलन के साथ मै खुश ररहती हूँ । इसी तरह से 7 साल से मनोरंजन जगत मे सक्रिय और बालिका वधू ,यह रिश्ता क्या कहलाता है ,पवित्र रिश्ता जैसे धारावाहिक मे अपनी आवाज़ देने वाली गायिका पूर्वा मंत्री की खुशी भी संगीत मे ही बस्ती है ।

आज ही करे शुरुआत 

खुशी का कोई पैमाना नही है लेकिन लोगो ने खुद को किसी न किसी पैमाने से बाँध रखा है । कोई कहता है मेरे बच्चे की पढ़ाई पूरी हो जायेंगी तो मै खुश हो जाऊँगा ,मुझे प्रमोशन मिल जायेगा तो मै खुश हो जाऊँगा ,मेरी तनखाह बढ़ जायेंगी तो मै खुश हो जाऊँगा । यहाँ हर कोई खुशी की तलाश मे खुशी को पोस्टपोंन कर रहा है । खुद को पोस्ट डेटेड चेक कर रहा है । ठान ले तो आप आज -अभी से खुश हो सकते है । मनपसंद संगीत सुनिये , बच्चो के लिये नाश्ता बनाकर साथ मे खाईये ,खुद को अच्छा सा gift दीजिये । मन खुश हो जायेगा । घर को मन से लीजिये । 
पैमानों मे फंसेंगे तो जिंदगी यू ही गुजर जायेंगी । साइकोलाजिस्ट डा,प्रेरणा कोहली कहती भी है ," लोग खुद के साथ अच्छा होने को एंजाय नही करते बल्कि पडोसी और रिश्तेदारों की सफलता से जलते रहते है । 
ऐसे मे वो खुश कहाँ से रहेंगे ? विरोधी स्वभाव नकारात्मकता भर देता है । अगर हम यह जानने की कोशिश करे कि हम क्या महसूस कर रहे है और क्यों ?तो हम जिंदगी मे जिंदगी भर आसानी से खुश रह सकते है ।
सार यही है कि खुशी हमारे भीतर ही है और इसे पाना हमारे हाथ मे है बेशर्ते बाहर खोजने के बजाये इसे भीतर खोजे । 
खुशी के बारे मे पूछे गये एक सवाल के जवाब मे किसी ने बहुत ही अच्छा जवाब दिया कि इन्सान खुशी पाने मे सक्षम है ,बस अगर उसे अपने अन्दर के self start बटन का पता लग जाये । अगर ऐसा नही है तो हर वक़्त किसी ना किसी को आपको धक्का मारकर ही स्टार्ट करते रहन पड़ेगा । सच ही है कि खुशी अन्दर से बाहर आती है और लोग जीवन जी रहे है बाहर से । वे self start होने की बजाये push start हो रहे है और उन पर समाजिक बदलावों का प्रभाव आ रहा है । 
डा .बिंद्रा कहते है ,"लोग मन :स्तिथि ठीक करने की जगह परिस्तिथि ठीक करने मे लगे है । वे खुशी की तलाश मे है जबकि खुशी भीतर है । यह खुशी और आनँद अन्दर से बाहर तब ही आयेगा ,जब व्यक्ति बाहरी संघर्ष से मुक्त होगा ।"
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