स्लीप पैरालिसिस ' ghost या science'. कही आप भी इससे पीड़ित तो नही !


ऐसी कल्पना करे कि Hollywood movie 'The Conjuring ' का बाथशेबा का किरदार खून से सना एक चाकू लेकर आपके सामने खड़ा    है । आप बिस्तर मे डर से पूरी तरह जैसे जम गये है ,आपकी आँखे खुली है । यह काफी परेशान कर देने वाली बात है कि उस डरावनी फिल्म का द्रश्य किसी के लिये आम हो सकता है । परंतु यह स्लीप पैरालिसिस से पीड़ित व्यक्ति का अनुभव होता है और ऐसा ही कुछ अक्सर मेरे साथ मे हुआ करता था । 
Sleep paralysis by Dreamlifestruggle

 यह स्तिथि आपको बुरे से बुरे डरो की कल्पना करवाती है और आपको महसूस होता है कि आपकी छाती को किसी ने जकड़ रखा है । यही कारण है कि पुराने समय मे लोग कल्पना कर लेते थे कि उन पर किसी भूत -प्रेत का साया है । इसलिये इस स्तिथि को 'Nightmare' (रात की डायन ) कहाँ जाता है ।
जब मुझे ये Problem लगातार होने लगी तो मैने अपने बहुत से दोस्तो ओर  तो ओर अपने अध्यापकों से भी पुछा ,लेकिन उनका जवाब मुझे कुछ खास नही लगा ।
अपने घर वालो से भी मैने बात की तो उनका भी यही मानना था जो बाकी लोग बता रहे थे कि तुम्हारी chest पर दबाव पड़ता है । जिस वजह से ऐसा होता है पर उनके जवाब से मै सन्तुष्ट नही था क्योंकि इतना तो मै भी जानता था और ये जवाब कोई तसस्ली लायक भी नही था ,फ़िर अचानक एक दिन मुझे किसी  जगह से इसके बारे मे पता चला ,और तब मालूम हुआ कि इसे स्लीप पैरालिसिस कहते है ।


स्लीप पैरालिसिस क्या है ?

यह नींद संबंधी व्याधि है जिसमे सोते समय मांशपेशियों की निष्किरियता शामिल है , इसमे अक्सर एक भ्रम पैदा होता है । R.E.M (Rapid Eye Movement ) के दौरान यह शरीर को प्रभावित करता है । यह किसी भी तरह की शारिरिक गतिविधि को रोक कर शरीर की मांसपेशियों को अपाहिज करता है । 
इसका परिणाम होता है कि शरीर जाग रहा होता है ,भयंकर सपना देख रहा होता है परंतु हिल नही पाता ।
दूसरी तरफ़ इसे एक तरह का दौरा कह सकते है जो कि कुछ समय के लिये होता है जिसकी अवधि साल मे 2 या 3 बार ,महीने मे 2 या 3 बार और किसी को तो हफ्ते मे 2 या 3 बार हो सकता है । लेकिन एक बहुत ही हैरान करने वाली बात है कि इससे शरीर को कोई नुकसान नही पहुँचता ।


स्लीप पैरालिसिस से रात को पैदा होने वा ले भ्रम ।

1999 मे तीन शोधकर्ताओं ने स्लीप पैरालिसिस मे पैदा होने वाले भ्रमों के बारे मे वर्णन किया  था ।

1. इन्ट्रुडर हैलूसिनेश्न्स ।
इसमे किसी अलौकिक शक्ति की मौजूदगी का एहसास होता है ।

2. इन्क्यूब्स  हैलूसिनेश्न्स ।
इसमे छाती मे दबाव तथा शरीर मे दर्द का अनुभव होता है ।

3. आउट आफ बाडी  हैलूसिनेश्न्स ।
इसमे उड़ने जैसा एहसास होता है । 
अक्सर ये भ्रम एक combination मे पैदा होते है ।


स्लीप पैरालिसिस की अवधि या समय ।

हालांकि ,ड्रग्स या अल्कोहल के सेवन या अच्छी नींद की कमी के चलते स्लीप पैरालिसिस लम्बे समय तक भी हो सकता है फ़िर भी यह एक दो मिनट से लेकर 10-15 मिनट तक तो चलता ही है । 

India मे जब इसका शोध हुआ तो उसमे एक भाई बहन को लिया गया ,जिसमे जय को 6 महीनों मे स्लीप पैरालिसिस के दो दौरे पड़े ,जबकि उसकी बहन राधा को एक सप्ताह मे तीन बार यह दौरा पड़ा । 
20 वर्षीय राधा कहती है कि यह बहुत ही डरावना था । पढ़ाई के कारण मुझे देर रात तक जागना पड़ता था । मेरा दिमाग पूरी तरह चौक्ना था इसलिये मेरी चेतना सोते हुए भी जाग्रत होती थी ।


स्लीप पैरालिसिस से बचने के लिये क्या करना चाहिये -आम लोगो की राय ।

इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति एक ही सलाह देते है कि किसी से बात करे । किसी बुरे सपने की तरह ऐसी घटना को छोड़ देना आसान है परंतु राधा कहती है "इस हालत को खुद तक रखना खतरनाक हो सकता है यदि समस्या गम्भीर और जारी रहती है तो मैडिकल सहायता ज़रूर ले ।"
18 वर्षीय जय महता जो कि स्लीप पैरालिसिस से पीडित थे वो कहते है कि मैने एक बार अपनी साँस रोकने की कोशिश की थी और इससे मुझे काफी सहायता मिली थी । 


स्लीप पैरालिसिस से बचने के लिये क्या करना चाहिये -Doctors की राय ।

Sleep Disorder क्लिनिक की डा. प्रीति देवरानी के अनुसार ," स्लीप पैरालिसिस से निपटने का प्रमुख बिंदु है इससे बचाव । आरामदायक अवस्था मे होना महत्वपूर्ण है । जब आप खुद को कहते है कि यही परिघटना कुछ समय के लिये ही है और जल्द ही ख़त्म हो जायेगी तो यह बहुत ही सहायक सीध हो जायेगी । 
आप ऐसी अवस्था मे अपनी मांशपेशियों को दोबारा हरकत मे लाने के लिये अपनी उँगलियो को हिलाने की कोशिश कर सकते   है ।

इसे नियंत्रित करे ।
जैसा कि इसके नाम से लगता है स्लीप पैरालिसिस इतनी खतरनाक नही है और यह अधिक नुकसानदायक नही है । इसे नियंत्रित करने का पहला उपाय है  कि आप आरामदायक और बाधा रहित नींद ले ।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अवसाद ,बैचेनी या तनाव से भी स्लीप पैरालिसिस की समस्या पैदा हो सकती है । जय का कहना है कि जब वह फोन ,लेपटाप या टेलीविजन देखे बिना नींद लेता है तो उसे बढ़िया नींद आती है । वह कहता है electronic device के कारण प्रयोग के बिना जब आप सोते है तो काफी सहायता मिलती है ।


Author की ओर से ।

मै इस प्राब्लम से कई बार गुजर चुका हूँ और इतनी ज्यादा बार इसका सामना कर चुका हूँ कि जब भी मे स्लीप पैरालिसिस मे जाता तो उस वक़्त मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा  होता । उससे मुझे कुछ खास फर्क नही पड़ता लेकिन वही दूसरी तरफ़ इसका शुरआती अनुभव मेरे लिये काफी डरावना रहा था ।
और मैने जो experience किया वो ये है कि इससे बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वो है अपने अन्दर के डर को ख़त्म करना । 
इसका बहुत सीधा सा जवाब है कि जब भी मुझे इससे डर लगता तो जो मुझे किसी ने समझाया था , वैसे ही मै कभी -कभी अपने बिस्तर के नीचे एक जूठा बरतन रख देता (वो एक गिलास भी हो सकता है जिसमे मैने पानी पिया हो ) और फ़िर आराम से सो जाता और उस दिन मुझे आराम से नींद आती ।
उसका जवाब मुझे तब समझ नही आया लेकिन अब समझ मे आता है कि अगर मुझे डरावने सपने आने बँद हो जाते तो उसकी वजह वो गिलास नही थी बल्कि एक मजबूत कारण था जिस वजह से ऐसा हुआ और वो था मेरा believe system.
जैसे कि स्लीप Disorder क्लिनिक की डा. प्रीति देवरानी कहती है कि अगर आप खुद को समझा लेगे कि यह सिर्फ कुछ समय के लिये ही है और इसका सामना मे बिना डरे कर सकता हूँ तो आप को इससे छूटकारा मिल सकता है ।
और यही मेरे साथ हुआ जब मै वो गिलास रखता था तो मुझे लगता था कि अब मुझे स्लीप पैरालिसिस का सामना नही करना पड़ेगा और ऐसा ही मेरे साथ होता था ।
लेकिन जब मैने deeply इसके बारे मे सोचा तब मुझे पता चला कि असर गिलास का नही हुआ बल्कि उस बिलीव का हुआ जिस वजह से मै मानने लगा कि अब मेरे साथ ऐसा नही   होगा ।
और जल्द ही मैने गिलास रखना भी बँद कर दिया और इससे छूटकारा पा लिया ।

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