आखिर R.B.I क्यों नही छापती unlimited currency ? कारण जानिये ।

बचपन मे मेरे मन मे अक्सर ये सवाल घूमता रहता था कि अगर India के पास खुद की नोट छापने की मशीन है तो वो ज्यादा पैसा क्यों नही छापती ,ताकि हम सब अमीर हो सके ।
Economy describe by dreamlifestruggle
हो सकता है कि आपके मन मे भी ये सवाल ज़रूर आता हो कि अगर हमारे पास नोट छापने की मशीन होती तो हम ज्यादा नोट छापते जिससे सब अमीर हो सके । देश मे महँगाई कम हो सके और unemployment ख़त्म हो सके ,लेकिन ऐसा कुछ नही होता  इसलिये मे आप सभी को ये बताना चाहूंगा कि ऐसा कोई देश क्यों नही करता और जिन्होने ऐसा किया और unlimited currency छापी तो उनके साथ क्या -क्या हुआ । तो चलिये जानते है कि ऐसा कोई देश क्यों नही करता ।

R.B.I क्यों नही छापती unlimited currency ?

मै आपको कुछ आसान तरीकों से समझाने की कोशिश करता हूँ । दोस्तो किसी देश मे कितनी currency छापी जायेगी,ये उसकी G.D.P (Gross Domestic product ) से तय होता है । G.D.P का मतलब है कि उस देश के अन्दर एक साल मे कितनी goods and services तैयार की गयी है । मतलब कि उस देश मे एक साल मे कितने products तैयार हुए है ,उस हिसाब से उस देश की currency छापी जाती है ।
Total value of products or services = total value of currency 
मतलब कि उस देश के अन्दर जितने  products है ,उसकी currency भी उसके equal होनी चाहिये । जितने products की value है ,उतनी ही currency छापी जाती है ,ताकि लोग ऊन products को खरीद सके । अगर कोई देश या वहाँ की government हद से ज्यादा currency छापती है तो वहाँ बहुत ज्यादा महँगाई हो जायेगी । वहाँ के products भी उतने ही महँगे हो जायेगे । अगर ज्यादा currency होगी तो लोगो के पास ज्यादा पैसा होगा ,जिससे चीजो की demand ज्यादा होगी । लोगो के काम करने की संख्या मे कमी आयेगी । क्योंकि हम काम क्यों करते है ताकि हमे पैसा मिले और उस पैसे से हम ज़रूरी चीजे खरीद सके ,लेकिन अगर पहले ही हमारे पास ढेर सारा पैसा आ जाये तो जाहिर सी बात है कि हम काम कम करेंगे । हम काम कम करेंगे,पर चीजे ज्यादा खरीदेंगे क्योंकि हमारे पास ज्यादा पैसा होगा । काम की कमी के कारण production मे भी कमी आयेगी । इस तरह पीछे से supply कम हो जायेगी लेकिन चीजो की demand उतनी ही ज्यादा बढ़ती जायेगी तो जाहिर सी बात है कि वहाँ तो महँगाई होगी ही । इसे मे एक example से समझाने की कोशिश करता हूँ । मान लीजिये की एक देश मे 2 kg गेहूँ है और गेहूँ की कीमत 10 रुपये प्रति किलो है । उस देश मे दो ही व्यक्ति रहते है । वहाँ की government 20 रुपये छापती है । अब दोनो लोगो के पास 10 -10 रुपये है और वो आसानी से किलो गेहूँ खरीद सकते है । लेकिन अगर वही दूसरी तरफ वहाँ की government 20 रुपये की जगह 40 रुपये छापती है तो अब दोनो व्यक्तियों के पास भी 20-20 रुपये आ जायेगे और वो गेहूँ जो कि 10 रुपये किलो था उसका price भी बढ़कर 20 रुपये किलो हो जायेगा । क्योंकि उसे बेचने वाला यही सोचेगा कि वो गेहूँ को ज्यादा से ज्यादा कीमत पर बेचे । ताकि वो ज्यादा पैसे कमा सके । इस तरह चीजो के दाम भी अपने आप बढ़ जायेगे और उस देश मे महँगाई आपने आप ज्यादा हो जायेगी । इसकी को मुद्रास्फीति (Inflation) कहते है ।
 सलिये दोस्तो कोई भी देश इसलिये unlimited currency नही छापता । जिन्होने ऐसी गलती की उनके साथ क्या -क्या हुआ । आइये जानते है ।

किन -किन देशों ने ऐसी गलती की ।

दोस्तो इतेहास मे काफी ऐसे देश है जिन्होने ऐसी गलती की थी और जिसकी वजह से उन्हे बुरे खमियाजे भुगतने पड़े । लेकिन दो ऐसे देश है जिनकी अर्थव्यवस्था काफी खराब हुई थी । पहला देश है जर्मनी और दूसरा देश है जिम्बाबे । इनके साथ क्या-क्या हुआ आइये जानते है ।
जिन्होने ये गलती की थी ,उनमे से पहले जो देश का नाम आता है वो है जर्मनी । ये बात 1923 की है जब पहला विश्व युध (world war 1 ) ख़त्म हो चुका था । पहले विश्व युध से गुजरने के कारण जर्मनी आर्थिक रुप से बहुत कमजोर हो चुका था । उस देश ने बाकी देशों से मदद के लिये काफी सारा पैसा उधार लिया लेकिन जब वापिस करने की बारी आयी तो वहाँ कि जो government थी उसके पास इतना पैसा नही था और देश आर्थिक रुप से भी काफी पिछड़ चुका था । जिस वजह से उन्होने ये सोचा कि क्यों ना वो ज्यादा पैसा छाप ले,ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मे सुधार आ सके और उन्होने ऐसा ही किया । लेकिन उसके बाद वहाँ पर महँगाई बहुत ज्यादा बढ़ गयी और वहाँ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ख़त्म हो गयी । वहाँ चीजे इतनी ज्यादा महँगी हो गयी कि पैसों की वेल्यू मे भी उतनी ही कमी आयी और लोग अपने घरो मे उन्हे wallpaper के तौर पर चिपकाने लगे । क्योंकि चीजे महँगी होने के कारण जिन नोटो की वेल्यू कम थी उनका कुछ आता ही नही था । आप इस तस्वीर मे भी देख सकते है ।
यही गलती ठीक जिम्बाबे ने 2008 मे की थी । जब वहाँ की government ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिये बहुत सारी currency छाप दी । इससे हुआ क्या ,वहाँ के लोग तो millionaire बन गये लेकिन इसके जो परिणाम निकलकर सामने आये वो बहुत भयानक थे । उस देश मे महँगाई इतनी ज्यादा बढ़ गयी कि अगर किसी को दुध का एक packet भी खरीदना होता तो उसे उसकी बहुत ज्यादा कीमत देनी पड़ती । वो लोग समान खरीदने के लिये अपने साथ ढेर सारा पैसा लेकर जाते थे । आप नीचे  फोटो मे देख सकते है !
हालात इतने गम्भीर हो चुके थे कि एक pen की कीमत लगभग एक million तक पहुँच चुकी थी । वहाँ पर  million , billion और यहाँ तक कि  trillion के नोट भी छपे थे । आप नीचे फोटो मे देख सकते है ।
आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि वहाँ के लोगो को समान खरीदने के बदले कितने पैसे देने पड़ते होगे । खेर बाद मे वहाँ की government ने वहाँ की जो currency थी वो legal tender से बाहर कर दी ,सरकार ने लोगो को ये सुझाव दिया कि वे उस currency को नष्ट कर दे । इस घटना को history मे Hyper inflation से जाना जाता है और बाद मे किसी भी देश ने ऐसी गलती नही दोहराई । अगर आपको ये पसंद आये तो ज़रूर शेयर करे ।

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