संभव ही नही ! Motivational poem in Hindi.

संभव ही नही ! Motivational poem in Hindi.
Motivational poem written by Meghna from Mumbai. Such a poem which helped us to find ourselves.

                   Image credit: pixbay

पहचान अपने भीतर छुप अदभुत अनोखे स्वयं को ,
उसे टटोल कर देख हुनर ना हो को ,संभव ही नही ।
उलझा रहता है तू जीवन की जद्दोजहद मे ,
मुलाकत जब होगी खुद से ! पहेलिया ना सुलझ जाये ,संभव ही नही ।

अंधेरों के द्वार खोल दे उन्हे किरणो से भरने दे ,
अपनी खूबसूरती को निहार कर मुस्कुराना ना सीख जाये,संभव ही नही ।

जिंदगी की रंगीनियों मे खुद को ना बूझने दे ! थम जा, ठहर जा ,
अंतर्मन की शमा से उजियारा ना मिले ,संभव ही नही ।

तू ही खुद का सबसे बड़ा सहारा ,तू ही तारणहार ,
बन ख्वेया अपनी नाव का ! किनारा ना मिले,संभव ही नही ।

दुनिया कहे तुझे काँच का टूकड़ा ,या कहे पत्थर,
अपनो की पारखी नज़र तुझे हीरा ना कह दे ,संभव ही नही ।

भूत से भविष्य की दौड़ मे ! अब खुद को ना थकने दे ,
यह वक्त ही तो है ! जो चलना भूल जाये ,ऐसा संभव ही नही ।

Author:
मेघना बैद ,मुम्बई 

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