तारो के एक शहर मे - A heart touching poem in Hindi.

एक प्यारी सी खूबसूरत कविता जो शायद मैंने ऐसे ही लिखी है , अगर आपको ये पसंद आये तो हमें कमेंट करके जरूर बताये,

"तारो के शहर मे "



 तारो के एक शहर मे,

अपनों की उन बातो मे,

मै गुमसुम सा यु रहता हुँ !

खुशी भरी इस आहट मे,

मुस्कुराती हुई उस उलझन मे,

खोया-खोया रहता हुँ !

है शख्स हज़ार मेरे पास,

हज़ारों पंछी दिखते है आस - पास,

उन पंछीयो के बीच मे मै,

एक परिंदा बनकर उड़ता हुँ !

कदम चूमता हर कोई मेरा,

तलाश मे वो दिखे अधेरा  ,

उस अँधेरे के दामन मे मै,

भुला - भटका रहता हुँ !

टूट जाते है वो लहमे,

छुट जाते है वो अपने,

जिन्हे भांत -भांत की वादियों से,

पल -पल समेटता रहता हुँ,

Yuvin - Yuvin कहता हुँ मै,

कही कहते - कहते रुक जाता हुँ,

तेरे लिखें हुए हर लफ्जो की,

गहराईयो मे डूब जाता हुँ !

तारो के एक शहर मे,

अपनों की उन बातो मे,

मै गुमसुम सा यु रहता हुँ !

मै गुमसुम सा यु रहता हुँ !

Yuvin kalotiya (writer)